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सफलता के रास्ते में आने वाले भौगोलिक सीमाओं और बाधाओं को पार किया

सफलता के रास्ते में आने वाले भौगोलिक सीमाओं और बाधाओं को पार किया

अतीत: यह सम्मानित २५ वर्षीय वैज्ञानिक 'एलना' नामक एक सुदूर ग्रामीण इलाके से ताल्लुकात रखते हैं जहां पर उन्हें स्कूल जाने के लिए नंगे पैर कई किलोमीटर चलना पड़ता था।
वर्तमान: यह युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्राप्त करने के लिए दक्षिण कोरिया की राजधानी शहर सियोल की उड़ान ले रहा है।
ये आश्चर्यजनक परिवर्तन रात भर में नहीं हुआ था। ये इस युवक कि अपनी चित्त की दृढ़ता एक उद्यमी वैज्ञानिक के रूप में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने कि वजह से हुइ थी। वह एक साधारण लड़के की तरह दिखता है। पर जब आप उनके साथ बातचीत शुरू करते हैं, तब आपको उनके  ज्ञान और शिक्षित होने का आभास होता है। जब आप अपने शोध निष्कर्षों का निरीक्षण करते हैं, तो आपको उनके उच्च लक्ष्य का पता लगता है और यह दृष्टि उन्हें वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य सूचना विज्ञान के क्षेत्र में सबसे ऊंची चोटी तक पोहचा सकता है। अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने की उनकी महत्वाकांक्षा उन्हें आंध्र प्रदेश के दूरस्थ श्रीकाकुलम गांव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जा सकती है।

उन्हें युवा वैज्ञानिक पुरस्कार के करीब क्या ले गया?

मधुमेह आज एक वैश्विक खतरा बन चुका है जिस कि वजह से पूरी दुनिया आहार नियंत्रण और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान केंद्रित कर रहि ताकि मधुमेह के परिणामस्वरूप चयापचय सिंड्रोम जैसे दिल, गुर्दे और नेत्र रोग विशेषज्ञ जैसी कई अन्य बीमारिया न हो।
क्या ऐसा हो सकता है कि कोई व्यक्ति पहले से ही कम से कम १० साल पहले मधुमेह होने के लक्षण पहचान सके?
यह वह शोध है जिसने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया और उसे युवा वैज्ञानिक पुरस्कार लेने के लिए छात्र नवप्रवर्तनक के रूप में आमंत्रित किया।
उनके माता-पिता ने छोटे लड़के को अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में ले जाने का सपना देखा नहीं होगा जब वे उन्हे गांव के स्कूल में दाखिल करवाया था जहा केवल ५वी कक्षा तक पढ़ाते थे। उन्होंने अपना हाईस्कूल शिक्षा पास के शहर से हि लिया, जो कि उनके घर से ८ किमी दूर है। तब से लेकर आज तक स्रिनुबाबु ने कभि पीचे मूढ़ के नहीं देख और वो आंध्र विश्वविद्यालय मे अनुसंधान के विद्वान के रुप मे उभरे जहा उन्होने मधुमेह की शुरुआत का अनुमान लगाने के लिए प्रोटीन पर बायोमाकर्स के रूप में एक विश्लेषण किया। आज श्री अप्पैल नायडू और यशोधम्मा अपने बेटे को ले के गर्व महसुस करते है।

एशिया-ओसीनिया मानव प्रोटीन संगठन सोसाइटी ऑफ मास स्पेक्ट्रोमेट्री के सहयोग से युवा वैज्ञानिकों को उत्कृष्ट नवाचारों के लिए वार्षिक पुरस्कार प्रस्तुत किया जाता है और श्रीनुबाबू अपने अध्ययन पेश करने वाले १५०० प्रतिभागियों में से एक विजेता हैं।

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